Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.34: वह पुरुष प्रभावशाली कहलाता है। वही शाश्वत लोक को प्राप्त करता है। क्रोधी पुरुष अज्ञानी होता है। वह इस लोक में और परलोक में भी विनाश को प्राप्त होता है ॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभाववानपि नरस्तस्य लोका: सनातना:।
क्रोधनस्त्वल्पविज्ञान: प्रेत्य चेह च नश्यति॥ ३४॥
अनुवाद
वह पुरुष प्रभावशाली कहलाता है। वही शाश्वत लोक को प्राप्त करता है। क्रोधी पुरुष अज्ञानी होता है। वह इस लोक में और परलोक में भी विनाश को प्राप्त होता है ॥ 34॥
That man is called influential. He alone attains the eternal world. An angry man is ignorant. He is destined for destruction in this world as well as the next. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥