Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.29.21: क्रोध का त्याग करने से मनुष्य उत्तम तेज प्राप्त करता है। हे बुद्धिमान्! क्रोधी पुरुषों के लिए काल का तेज अत्यन्त असह्य है।   |   mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.29.21 
क्रोधं त्यक्त्वा तु पुरुष: सम्यक् तेजोऽभिपद्यते।
कालयुक्तं महाप्राज्ञे क्रुद्धैस्तेज: सुदु:सहम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
क्रोध का त्याग करने से मनुष्य उत्तम तेज प्राप्त करता है। हे बुद्धिमान्! क्रोधी पुरुषों के लिए काल का तेज अत्यन्त असह्य है।
 
By abandoning anger, a man attains a good brilliance. O wise one! The brilliance of the time is extremely unbearable for angry men. 21.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)