Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.29.11: जो मनुष्य मन को वश में न कर पाने के कारण क्रोध में मरता है, वह इस लोक और परलोक दोनों को खो देता है। इसलिए हे द्रुपदपुत्री! असमर्थों का क्रोध को वश में कर लेना ही श्रेयस्कर माना गया है॥ 11॥ | mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य मन को वश में न कर पाने के कारण क्रोध में मरता है, वह इस लोक और परलोक दोनों को खो देता है। इसलिए हे द्रुपदपुत्री! असमर्थों का क्रोध को वश में कर लेना ही श्रेयस्कर माना गया है॥ 11॥
The person who dies in anger due to not being able to control his mind, loses both this world and the next. Therefore, O daughter of Drupada, it is considered better for the incapable to control his anger.॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥