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mahabharat 3.29.10: यदि मूर्ख और असहाय मनुष्य दूसरों के द्वारा कष्ट दिए जाने पर बलवानों पर भी क्रोध करता है, तो वह स्वयं ही अपना विनाश कर लेता है ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 29: युधिष्ठिरके द्वारा क्रोधकी निन्दा और क्षमाभावकी विशेष प्रशंसा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.29.10 
मूढो यदि क्लिश्यमान: क्रुध्यतेऽशक्तिमान्नर:।
बलीयसां मनुष्याणां त्यजत्यात्मानमात्मना॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यदि मूर्ख और असहाय मनुष्य दूसरों के द्वारा कष्ट दिए जाने पर बलवानों पर भी क्रोध करता है, तो वह स्वयं ही अपना विनाश कर लेता है ॥10॥
 
If a foolish and helpless man, when troubled by others, becomes angry even with powerful men, he himself brings about his own destruction. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)