vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 288: इन्द्रजित् का मायामय युद्ध तथा श्रीराम और लक्ष्मणकी मूर्च्छा
»
श्लोक 3
श्लोक
3.288.3
त्वया हि मम सत्पुत्र यशो दीप्तमुपार्जितम्।
जित्वा वज्रधरं संख्ये सहस्राक्षं शचीपतिम्॥ ३॥
अनुवाद
पुत्र! तुमने युद्ध में हजार नेत्रों वाले वज्ररूपी इन्द्र को परास्त करके उज्ज्वल यश अर्जित किया है॥3॥
Son! You have earned bright fame by defeating Indra, the thousand-eyed thunderbolt, in the battle. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×