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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 285: श्रीराम और रावणकी सेनाओंका द्वन्द्वयुद्ध  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.285.1-2 
मार्कण्डेय उवाच
ततो निविशमानांस्तान् सैनिकान् रावणानुगा:।
अभिजग्मुर्गणानेके पिशाचक्षुद्ररक्षसाम्॥ १॥
पर्वण: पतनो जम्भ: खर: क्रोधवशो हरि:।
प्ररुजश्चारुजश्चैव प्रघसश्चैवमादय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं: युधिष्ठिर! जब वानर सेना शिविर में प्रवेश करने लगी, तब रावण की सेना में शामिल पर्वण, पाटन, जम्भ, खर, क्रोधवश, हरि, प्रारुज, अरुज और प्रघास आदि भूत-प्रेतों और दुष्ट राक्षसों के अनेक समूह आकर उन पर आक्रमण करने लगे।
 
Mārkaṇḍeya says: Yudhishthir! When the monkey army started entering the camp, several groups of ghosts and evil demons such as Parvana, Patan, Jambha, Khar, Krodhavash, Hari, Praruj, Aruj and Praghas who were part of Ravan's army came and attacked them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)