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mahabharat 3.283.7: वानरों में सबसे वृद्ध और वीर श्री दधिमुख अपने साथ भयंकर तेज से युक्त वानरों की एक विशाल सेना लेकर आए ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.283.7 
श्रीमान् दधिमुखो नाम हरिवृद्धोऽतिवीर्यवान्।
प्रचकर्ष महासैन्यं हरीणां भीमतेजसाम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वानरों में सबसे वृद्ध और वीर श्री दधिमुख अपने साथ भयंकर तेज से युक्त वानरों की एक विशाल सेना लेकर आए ॥7॥
 
Among the monkeys, Mr. Dadhimukh, the oldest and most valiant, brought with him a huge army of monkeys endowed with terrible brilliance. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)