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mahabharat 3.283.4: महाराज! गोलंगुल (लंगूर) प्रजाति का वह वानर गवाक्ष, जो देखने में बहुत भयानक था, साठ हजार करोड़ (छह खरब) वानरों की सेना लेकर प्रकट हुआ।   |   mahabharat अध्याय 3.283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 283: वानर-सेनाका संगठन, सेतुका निर्माण, विभीषणका अभिषेक और लंकाकी सीमामें सेनाका प्रवेश तथा अंगदको रावणके पास दूत बनाकर भेजना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.283.4 
षष्टिकोटिसहस्राणि प्रकर्षन् प्रत्यदृश्यत।
गोलाङ्गूलो महाराज गवाक्षो भीमदर्शन:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! गोलंगुल (लंगूर) प्रजाति का वह वानर गवाक्ष, जो देखने में बहुत भयानक था, साठ हजार करोड़ (छह खरब) वानरों की सेना लेकर प्रकट हुआ।
 
Maharaj! The monkey Gavaksha of the Golangul (langur) species, who was very fearsome to look at, appeared with an army of sixty thousand crore (six trillion) monkeys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)