श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 280: राम और सुग्रीवकी मित्रता, वाली और सुग्रीवका युद्ध, श्रीरामके द्वारा वालीका वध तथा लंकाकी अशोकवाटिकामें राक्षसियोंद्वारा डरायी हुई सीताको त्रिजटाका आश्वासन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.280.34 
स मालया तदा वीर: शुशुभे कण्ठसक्तया।
श्रीमानिव महाशैलो मलयो मेघमालया॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस समय वीर सुग्रीव उस माला को गले में धारण करके मेघों की पंक्ति से सुशोभित महापर्वत मलय के समान शोभा पा रहा था ॥ 34॥
 
With that garland around his neck, the brave Sugreeva at that time looked like the mighty mountain Malaya adorned with a row of clouds. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)