श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.279.8 
यत्र यत्र तु वैदेही पश्यत्याश्रममण्डलम्।
सरो वा सरितो वापि तत्र मुञ्चति भूषणम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
विदेहकुमारी सीता जहाँ भी कोई आश्रम, सरोवर या नदी देखतीं, वहीं अपना कोई न कोई आभूषण रख देतीं।
 
Wherever Videha Kumari Sita would see an ashram, a lake or a river, she would drop one or the other of her ornaments there.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd