vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप
»
श्लोक 40
श्लोक
3.279.40
तस्य देहाद् विनि:सृत्य पुरुषो दिव्यदर्शन:।
ददृशे दिवमास्थाय दिवि सूर्य इव ज्वलन्॥ ४०॥
अनुवाद
उसके शरीर से एक दिव्य सत्ता प्रकट हुई और आकाश में खड़ी दिखाई दी। वह सूर्य के समान चमक रही थी। 40.
A divine being emerged from his body and was seen standing in the sky. He was shining like the Sun. 40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×