vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप
»
श्लोक 30
श्लोक
3.279.30
यदृच्छयाथ तद् रक्ष: करे जग्राह लक्ष्मणम्।
विषादमगमत् सद्य: सौमित्रिरथ भारत॥ ३०॥
अनुवाद
वह एक राक्षस था। उसने अचानक आकर लक्ष्मण का हाथ पकड़ लिया। हे प्रभु! यह देखकर सुमित्रापुत्र लक्ष्मण तुरन्त बहुत दुःखी हो गए। 30।
He was a demon. He suddenly came and caught hold of Lakshmana's hand. O Lord! Seeing this, Sumitra's son Lakshmana immediately became very sad. 30.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×