श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 279: रावणद्वारा जटायुका वध, श्रीरामद्वारा उसका अन्त्येष्टि-संस्कार, कबन्धका वध तथा उसके दिव्य स्वरूपसे वार्तालाप  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.279.20 
स तावुवाच तेजस्वी सहितौ रामलक्ष्मणौ।
गृध्रराजोऽस्मि भद्रं वां सखा दशरथस्य वै॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब तेजस्वी जटायु ने अपने साथ आए दोनों भाइयों श्रीराम और लक्ष्मण से कहा - 'आप दोनों का कल्याण हो। मैं राजा दशरथ का मित्र गिद्धराज जटायु हूँ।'
 
Then the radiant Jatayu said to the two brothers Shri Ram and Lakshman who had come with him - 'May you both be blessed. I am Jatayu, the vulture king, a friend of King Dasharath.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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