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mahabharat 3.278.9-10h: मारीच ने सोचा, 'यदि मृत्यु निश्चित है, तो किसी सज्जन पुरुष के हाथों मरना ही अच्छा होगा; इसलिए मैं रावण द्वारा इच्छित कार्य अवश्य ही करूंगा।'   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  3.278.9-10h 
मारीचश्चिन्तयामास विशिष्टान्मरणं वरम्॥ ९॥
अवश्यं मरणे प्राप्ते करिष्याम्यस्य यन्मतम्।
 
 
अनुवाद
मारीच ने सोचा, 'यदि मृत्यु निश्चित है, तो किसी सज्जन पुरुष के हाथों मरना ही अच्छा होगा; इसलिए मैं रावण द्वारा इच्छित कार्य अवश्य ही करूंगा।'
 
Maricha thought, 'If death is certain, then it would be better to die at the hands of a noble man; therefore, I will certainly carry out the work desired by Ravana.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)