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mahabharat 3.278.34: राक्षसराज रावण सीता द्वारा दी गई सब बातों को अनसुना करके अपने वास्तविक रूप में प्रकट हो गया और विदेह राजकुमारी को इस प्रकार सान्त्वना देने लगा॥34॥   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.278.34 
अवमन्य तत: सर्वं स्वरूपं प्रत्यपद्यत।
सान्त्वयामास वैदेहीमिति राक्षसपुङ्गव:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण सीता द्वारा दी गई सब बातों को अनसुना करके अपने वास्तविक रूप में प्रकट हो गया और विदेह राजकुमारी को इस प्रकार सान्त्वना देने लगा॥34॥
 
The demon king Ravana, ignoring all the things given by Sita, appeared in his real form and started consoling the Videha princess in this manner:॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)