Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.278.27-29h: हे मूर्ख! तू जो मन में कामना करता है, वह कभी पूरी नहीं होगी। मैं तलवार से अपना गला काट लूँगा, पहाड़ की चोटी से कूद जाऊँगा या जलती हुई आग में कूद जाऊँगा; परन्तु राम जैसे स्वामी को छोड़कर तेरे जैसे अधम पुरुष को कभी स्वीकार नहीं करूँगा। जैसे सिंहनी सियार को स्वीकार नहीं कर सकती, वैसे ही मैं तुझे भी स्वीकार नहीं करूँगा।॥27-28 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नैष कामो भवेन्मूढ यं त्वं प्रार्थयसे हृदा।
अप्यहं शस्त्रमादाय हन्यामात्मानमात्मना॥ २७॥
पतेयं गिरिशृङ्गाद् वा विशेयं वा हुताशनम्।
रामं भर्तारमुत्सृज्य न त्वहं त्वां कथंचन॥ २८॥
निहीनमुपतिष्ठेयं शार्दूली क्रोष्टुकं यथा।
अनुवाद
हे मूर्ख! तू जो मन में कामना करता है, वह कभी पूरी नहीं होगी। मैं तलवार से अपना गला काट लूँगा, पहाड़ की चोटी से कूद जाऊँगा या जलती हुई आग में कूद जाऊँगा; परन्तु राम जैसे स्वामी को छोड़कर तेरे जैसे अधम पुरुष को कभी स्वीकार नहीं करूँगा। जैसे सिंहनी सियार को स्वीकार नहीं कर सकती, वैसे ही मैं तुझे भी स्वीकार नहीं करूँगा।॥27-28 1/2॥
‘O fool! The thing you desire in your mind will never be fulfilled. I will slit my throat with a sword, jump from the top of a mountain or jump into a burning fire; but I will never accept a lowly man like you leaving behind a lord like Ram. Just like a lioness cannot accept a jackal, similarly I will not accept you.’॥ 27-28 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥