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mahabharat 3.278.23-25h: विदेहनन्दिनी सीता ने भी उसका करुण क्रंदन सुना। उसका क्रंदन सुनकर वे उस दिशा में दौड़ीं, जहाँ से वह स्वर आया था। तब लक्ष्मण ने उनसे कहा- 'अश्रुपूर्ण! भय की कोई बात नहीं है। ऐसा कौन है जो भगवान राम को मार सके? शुचिस्मिते! तुम दो घड़ी में ही अपने पति भगवान राम को यहाँ उपस्थित देख सकोगी।'   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 23-25h
 
 
श्लोक  3.278.23-25h 
शुश्राव तस्य वैदेही ततस्तां करुणां गिरम्॥ २३॥
सा प्राद्रवद् यत: शब्दस्तामुवाचाथ लक्ष्मण:।
अलं ते शङ्कया भीरु को रामं प्रहरिष्यति॥ २४॥
मुहूर्ताद् द्रक्ष्यसे रामं भर्तारं त्वं शुचिस्मिते।
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी सीता ने भी उसका करुण क्रंदन सुना। उसका क्रंदन सुनकर वे उस दिशा में दौड़ीं, जहाँ से वह स्वर आया था। तब लक्ष्मण ने उनसे कहा- 'अश्रुपूर्ण! भय की कोई बात नहीं है। ऐसा कौन है जो भगवान राम को मार सके? शुचिस्मिते! तुम दो घड़ी में ही अपने पति भगवान राम को यहाँ उपस्थित देख सकोगी।'
 
Videhanandini Sita also heard his pitiful cry. On hearing his cry, she ran in the direction from where the voice had come. Then Lakshman said to her- 'Tearful one! There is nothing to be afraid of. Who is there who can kill Lord Rama? Shuchismite! You will see your husband Lord Rama present here in just two hours.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)