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mahabharat 3.278.22-23h: श्री राम के बाण से घायल होकर मरते समय मारीच भी उन्हीं के समान स्वर में 'हे सीता, हे लक्ष्मण' कहकर चिल्लाया।   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  3.278.22-23h 
स रामबाणाभिहत: कृत्वा रामस्वरं तदा॥ २२॥
हा सीते लक्ष्मणेत्येवं चुक्रोशार्तस्वरेण ह।
 
 
अनुवाद
श्री राम के बाण से घायल होकर मरते समय मारीच भी उन्हीं के समान स्वर में 'हे सीता, हे लक्ष्मण' कहकर चिल्लाया।
 
Maricha, wounded by the arrow of Shri Rama, while dying cried out in the same voice as him, saying 'Oh Sita, Oh Lakshman'. 22 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)