Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.278.18-19h: नियति के विधान से प्रेरित होकर सीता ने भगवान राम को मृग लाने के लिए भेजा। सीता को प्रसन्न करने के लिए भगवान राम ने धनुष हाथ में लिया और सीता की रक्षा का भार लक्ष्मण को सौंपकर तुरंत मृग लाने के लिए चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  3.278.18-19h 
चोदयामास तस्यार्थे सा रामं विधिचोदिता।
रामस्तस्या: प्रियं कुर्वन् धनुरादाय सत्वर:॥ १८॥
रक्षार्थे लक्ष्मणं न्यस्य प्रययौ मृगलिप्सया।
 
 
अनुवाद
नियति के विधान से प्रेरित होकर सीता ने भगवान राम को मृग लाने के लिए भेजा। सीता को प्रसन्न करने के लिए भगवान राम ने धनुष हाथ में लिया और सीता की रक्षा का भार लक्ष्मण को सौंपकर तुरंत मृग लाने के लिए चल पड़े।
 
Inspired by the law of destiny, Sita sent Lord Rama to bring the deer. To please Sita, Lord Rama took the bow in his hand and entrusted the responsibility of protecting Sita to Lakshman and immediately set out to bring the deer. 18 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)