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mahabharat 3.278.14-15h: रावण की यह बात सुनकर मारीच स्वयं अपना श्राद्ध और तर्पण करके अत्यंत दुःखी होकर रावण के पीछे-पीछे चला॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 278: मृगरूपधारी मारीचका वध तथा सीताका अपहरण  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  3.278.14-15h 
इत्येवमुक्तो मारीच: कृत्वोदकमथात्मन:॥ १४॥
रावणं पुरतो यान्तमन्वगच्छत् सुदु:खित:।
 
 
अनुवाद
रावण की यह बात सुनकर मारीच स्वयं अपना श्राद्ध और तर्पण करके अत्यंत दुःखी होकर रावण के पीछे-पीछे चला॥14 1/2॥
 
Upon hearing Ravana say this, Maricha himself performed his own Shraddha and Tarpan and went ahead very sadly, following Ravana.॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)