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mahabharat 3.275.6: वे तेजस्वी महात्मा उनकी सेवा से प्रसन्न हुए और उनमें से प्रत्येक को उनकी इच्छानुसार लोकपालों के समान शक्तिशाली पुत्र प्रदान किया।   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.275.6 
स तासां भगवांस्तुष्टो महात्मा प्रददौ वरान्।
लोकपालोपमान् पुत्रानेकैकस्या यथेप्सितान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वे तेजस्वी महात्मा उनकी सेवा से प्रसन्न हुए और उनमें से प्रत्येक को उनकी इच्छानुसार लोकपालों के समान शक्तिशाली पुत्र प्रदान किया।
 
That glorious Mahatma became pleased with their services and blessed each of them with a son as powerful as the Lokpalas (guardians of the world) according to their desire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)