Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.275.4: हे भरतश्रेष्ठ! वे तीनों नृत्य और गायन कला में निपुण थे और महर्षि को प्रसन्न रखने के उपाय खोजते रहते थे। | mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ता: सदा तं महात्मानं संतोषयितुमुद्यता:।
ऋषिं भरतशार्दूल नृत्यगीतविशारदा:॥ ४॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वे तीनों नृत्य और गायन कला में निपुण थे और महर्षि को प्रसन्न रखने के उपाय खोजते रहते थे।
O best of the Bharatas! All the three were adept in the arts of dancing and singing and were always on the lookout for ways to keep the great sage happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥