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mahabharat 3.275.33: भगवान कुबेर लंका छोड़कर गंधर्वों, यक्षों, राक्षसों और किम्पुरुषों के साथ गंधमादन पर्वत पर रहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.275.33 
हित्वा स भगवाँल्लङ्कामाविशद् गन्धमादनम्।
गन्धर्वयक्षानुगतो रक्ष:किम्पुरुषै: सह॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भगवान कुबेर लंका छोड़कर गंधर्वों, यक्षों, राक्षसों और किम्पुरुषों के साथ गंधमादन पर्वत पर रहने लगे।
 
Lord Kubera left Lanka and started living on Gandhamadana mountain along with Gandharvas, Yakshas, ​​Rakshasas and Kimpurushas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)