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mahabharat 3.275.32: मार्कण्डेय कहते हैं: हे राजन! वरदान प्राप्त करके दशानन राक्षस ने सबसे पहले अपने भाई कुबेर को युद्ध में परास्त किया और उसे लंका राज्य से निकाल दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.275.32 
मार्कण्डेय उवाच
राक्षसस्तु वरं लब्ध्वा दशग्रीवो विशाम्पते।
लङ्कायाश्च्यावयामास युधि जित्वा धनेश्वरम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेय कहते हैं: हे राजन! वरदान प्राप्त करके दशानन राक्षस ने सबसे पहले अपने भाई कुबेर को युद्ध में परास्त किया और उसे लंका राज्य से निकाल दिया।
 
Mārkaṇḍeya says: O King! Upon receiving the boon the demon Dashanana first of all defeated his brother Kubera in battle and expelled him from the kingdom of Lanka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)