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mahabharat 3.275.17: कुंभकर्ण भी अपने भोजन पर नियंत्रण रखता था। वह ज़मीन पर सोता था और कठोर नियमों का पालन करता था। विभीषण केवल सूखा पत्ता खाकर जीवनयापन करता था। 17.   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.275.17 
अध:शायी कुम्भकर्णो यताहारो यतव्रत:।
विभीषण: शीर्णपर्णमेकमभ्यवहारयन्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कुंभकर्ण भी अपने भोजन पर नियंत्रण रखता था। वह ज़मीन पर सोता था और कठोर नियमों का पालन करता था। विभीषण केवल सूखा पत्ता खाकर जीवनयापन करता था। 17.
 
Kumbhakarana also controlled his food intake. He slept on the ground and followed strict rules. Vibhishana lived by eating only a dry leaf. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)