Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.275.11: कुंभकर्ण शारीरिक रूप से सबसे बलवान था। वह युद्धकला में भी सर्वश्रेष्ठ था। वह न केवल मायावी और युद्धकुशल था, बल्कि एक अत्यंत भयंकर रात्रिचर प्राणी भी था। | mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुंभकर्ण शारीरिक रूप से सबसे बलवान था। वह युद्धकला में भी सर्वश्रेष्ठ था। वह न केवल मायावी और युद्धकुशल था, बल्कि एक अत्यंत भयंकर रात्रिचर प्राणी भी था।
Kumbhakarana was the most physically strong. He was also the best in warfare. He was not only elusive and skilled in warfare, but he was also a very fearsome night creature.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥