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mahabharat 3.272.60: इसी समय भगवान नरसिंह एक अत्यंत शक्तिशाली हिरण का रूप धारण करके राक्षस के पास पहुंचे और अपने तीखे नाखूनों से उसे फाड़ डाला।   |   mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.272.60 
समुपेत्य ततस्तीक्ष्णैर्मृगेन्द्रेण बलीयसा।
नारसिंहेन वपुषा दारित: करजैर्भृशम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
इसी समय भगवान नरसिंह एक अत्यंत शक्तिशाली हिरण का रूप धारण करके राक्षस के पास पहुंचे और अपने तीखे नाखूनों से उसे फाड़ डाला।
 
At this very moment Lord Narasimha, in the form of a very powerful deer, went near the demon and tore him apart with his sharp nails.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)