Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.272.56-58h: तत्पश्चात् महाबाहु भगवान श्रीहरि ने एक अद्वितीय शरीर धारण किया, जिसमें आधा शरीर मनुष्य का और आधा सिंह का था। इस प्रकार सिंह का रूप धारण करके और हाथ लगाते हुए वे दैत्यराज हिरण्यकशिपु की सभा में गए। दैत्यों के पूर्वज और देवताओं के शत्रु, दितिनंदन हिरण्यकशिपु ने उस अद्भुत पुरुष को देखकर क्रोध से अपनी आँखें लाल कर लीं। 56-57 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् महाबाहु भगवान श्रीहरि ने एक अद्वितीय शरीर धारण किया, जिसमें आधा शरीर मनुष्य का और आधा सिंह का था। इस प्रकार सिंह का रूप धारण करके और हाथ लगाते हुए वे दैत्यराज हिरण्यकशिपु की सभा में गए। दैत्यों के पूर्वज और देवताओं के शत्रु, दितिनंदन हिरण्यकशिपु ने उस अद्भुत पुरुष को देखकर क्रोध से अपनी आँखें लाल कर लीं। 56-57 1/2॥
After that, the mighty-armed Lord Shri Hari assumed a unique body, in which half of the body was of a human and half of a lion. In this way, taking the form of a lion and touching hands, the demon king went to the meeting of Hiranyakashipu. Ditinandan Hiranyakashipu, the progenitor of the demons and enemy of the gods, turned his eyes red with anger after seeing that wonderful man. 56-57 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥