Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.272.51: पृथ्वी को जल में डूबा हुआ देखकर भगवान् ने उसे बाहर निकालने की इच्छा की और सोचने लगे कि, 'मैं कौन सा रूप धारण करके पृथ्वी को इस जल से छुड़ाऊँ?'॥51॥ | mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वी को जल में डूबा हुआ देखकर भगवान् ने उसे बाहर निकालने की इच्छा की और सोचने लगे कि, 'मैं कौन सा रूप धारण करके पृथ्वी को इस जल से छुड़ाऊँ?'॥51॥
Seeing the earth submerged in water, God desired to pull it out. He began to think, 'What form should I take to rescue the earth from this water?'॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥