Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.272.35: ‘यह प्रलयकाल की अग्नि को बुझा देता है। संवर्तक की अग्नि को नियंत्रित करने वाले वे महान् मेघ, दीर्घ सर्पों के समान मोटी धाराओं में जल डालकर सबको डुबो देते हैं।॥35॥ | mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘यह प्रलयकाल की अग्नि को बुझा देता है। संवर्तक की अग्नि को नियंत्रित करने वाले वे महान् मेघ, दीर्घ सर्पों के समान मोटी धाराओं में जल डालकर सबको डुबो देते हैं।॥35॥
‘This extinguishes the fire of the time of destruction. Those great clouds that control the fire of Samvartak drown everyone by pouring water in thick streams like long serpents.॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥