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mahabharat 3.272.16: तब भीमसेन ने राजा से कहा, 'कृपया द्रौपदी को यह बता दीजिए कि यह पापी जयद्रथ पाण्डवों का दास बन गया है।'   |   mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.272.16 
राजानं चाब्रवीद् भीमो द्रौपद्या: कथ्यतामिति।
दासभावगतो ह्येष पाण्डूनां पापचेतन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तब भीमसेन ने राजा से कहा, 'कृपया द्रौपदी को यह बता दीजिए कि यह पापी जयद्रथ पाण्डवों का दास बन गया है।'
 
Then Bhimasena also said to the King, 'Please inform Draupadi that this sinful Jayadratha has become the slave of the Pandavas.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)