श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.272.14 
ततस्तं रथमास्थाय भीम: पार्थानुगस्तदा।
अभ्येत्याश्रममध्यस्थमभ्यगच्छद् युधिष्ठिरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन को रथ पर बिठाकर आगे-आगे चले और अर्जुन उनके पीछे-पीछे। आश्रम में पहुँचकर भीमसेन राजा युधिष्ठिर के पास गए, जो बीच में बैठे हुए थे।
 
After placing him on the chariot, Bhima went ahead and Arjuna followed. On reaching the hermitage, Bhimasena went to King Yudhishthira who was sitting in the centre.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)