युधिष्ठिर उवाच
न हन्तव्यो महाबाहो दुरात्मापि स सैन्धव:।
दु:शलामभिसंस्मृत्य गान्धारीं च यशस्विनीम्॥ ४३॥
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले- महाबाहो! यद्यपि सिन्धुराज जयद्रथ बड़ा दुष्टात्मा है; परंतु बहन दुशाला तथा प्रसिद्ध माता गांधारी का स्मरण करके उसे मत मारो। 43॥
Yudhishthir said – Great arms! Although Sindhuraj Jayadratha is a very evil soul; However, remembering sister Dushaala and famous mother Gandhari, do not kill her. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥