श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.271.17 
तोमरैरभिवर्षन्तौ जीमूताविव वार्षिकौ।
एकैकेन विपाठेन जघ्ने माद्रवतीसुत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस समय बाणों की वर्षा करते हुए वे दोनों योद्धा वर्षा ऋतु के दो बादलों के समान प्रतीत हो रहे थे। किन्तु माद्रीनाथ के पुत्र नकुल ने विपथ नामक बाण से उन दोनों को घायल करके नीचे गिरा दिया।
 
At that time, the two warriors, showering arrows, looked like two clouds of the rainy season. But Madrinath's son Nakula shot each of them with an arrow called Vipath and brought them down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)