स भिन्नहृदयो वीरो वक्त्राच्छोणितमुद्वमन्।
पपाताभिमुख: पार्थं छिन्नमूल इव द्रुम:॥ १४॥
अनुवाद
तब हृदय विदीर्ण हो जाने के कारण वीर त्रिगर्त राजा राजा युधिष्ठिर के सामने ही मुख से रक्त वमन करते हुए जड़ से कटे वृक्ष के समान पृथ्वी पर गिर पड़े।
Then due to his heart being torn, the brave Trigarta king fell on the earth like a tree cut from its roots, vomiting blood from his mouth in front of King Yudhishthir.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥