द्रौपद्युवाच
किं ते ज्ञातैर्मूढ महाधनुर्धरै-
रनायुष्यं कर्म कृत्वातिघोरम्।
एते वीरा: पतयो मे समेता
न व: शेष: कश्चिदिहास्ति युद्धे॥ ४॥
अनुवाद
द्रौपदी बोली, "अरे मूर्ख! ऐसा भयंकर और जीवन का नाश करने वाला पाप कर्म करके अब तू इन महाधनुर्धर पाण्डव योद्धाओं का परिचय जानकर क्या करेगा? मेरे ये सभी वीर पति एकत्र हो गये हैं। उनके साथ होने वाले युद्ध में तेरे पक्ष का कोई भी पुरुष जीवित नहीं बचेगा।"
Draupadi said, "Oh fool! After committing such a horrible and evil deed that will destroy one's life, what will you do now by knowing the identity of these great archers, Pandava warriors? All these brave husbands of mine have gathered. In the war that is going to take place with them, no man from your side will survive."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥