तेषां ध्वजाग्राण्यभिवीक्ष्य राजा
स्वयं दुरात्मा नरपुङ्गवानाम्।
जयद्रथो याज्ञसेनीमुवाच
रथे स्थितां भानुमतीं हतौजा:॥ २॥
अनुवाद
उन श्रेष्ठ पुरुषों की ध्वजाओं के अग्रभाग देखकर दुष्ट राजा जयद्रथ हतोत्साहित हो गया और अपने रथ पर बैठी हुई तेजस्वी द्रौपदी से बोला - 2॥
Seeing the fronts of the flags of those best men, the evil king Jayadratha became discouraged and said to the radiant Draupadi sitting on his chariot - 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥