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श्लोक  3.27.15 
यच्च तद्रुक्मपात्रीभिर्ब्राह्मणेभ्य: सहस्रश:।
ह्रियते ते गृहादन्नं संस्कृतं सार्वकामिकम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
एक दिन ऐसा भी था जब आपके घर से हजारों ब्राह्मणों की रुचि के अनुसार तैयार स्वादिष्ट भोजन सोने की थालियों में परोसा जाता था।
 
There was a day when delicious food prepared as per the taste of thousands of Brahmins was served in golden plates from your house. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)