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mahabharat 3.268.9: अरे मूर्ख! जैसे बाँस, केला और सरकंडे अपने विनाश के लिए ही उगते हैं, अपनी समृद्धि के लिए नहीं। और जैसे केकड़ा अपनी मृत्यु के लिए ही गर्भ धारण करता है, वैसे ही तू मुझ पाण्डवों द्वारा सदैव सुरक्षित रहने वाली द्रौपदी का अपहरण केवल अपनी मृत्यु के लिए ही करना चाहता है।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.268.9 
यथा च वेणु: कदली नलो वा
फलन्त्यभावाय न भूतयेऽऽत्मन:।
तथैव मां तै: परिरक्ष्यमाणा-
मादास्यसे कर्कटकीव गर्भम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अरे मूर्ख! जैसे बाँस, केला और सरकंडे अपने विनाश के लिए ही उगते हैं, अपनी समृद्धि के लिए नहीं। और जैसे केकड़ा अपनी मृत्यु के लिए ही गर्भ धारण करता है, वैसे ही तू मुझ पाण्डवों द्वारा सदैव सुरक्षित रहने वाली द्रौपदी का अपहरण केवल अपनी मृत्यु के लिए ही करना चाहता है।॥9॥
 
Oh fool! Just as the bamboo, the banana and the reed grow only for their own destruction, not for their own prosperity. And just as the female crab conceives only for her own death, you want to abduct me, Draupadi, who is always protected by the Pandavas, only for your own death.'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)