Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.268.27: इसमें कोई संदेह नहीं कि जब तुम धर्मराज जैसे वीर पाण्डवों का सामना करोगे, तब तुम्हें इस पापकर्म का बुरा फल भोगना पड़ेगा ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.268.27 
क्षुद्रं कृत्वा फलं पापं त्वं प्राप्स्यसि न संशय:।
आसाद्य पाण्डवान् वीरान् धर्मराजपुरोगमान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि जब तुम धर्मराज जैसे वीर पाण्डवों का सामना करोगे, तब तुम्हें इस पापकर्म का बुरा फल भोगना पड़ेगा ॥27॥
 
There is no doubt that you will reap the bad consequences of this evil deed when you face the brave Pandavas like Dharmaraja. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)