Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.268.22: मैं जानती हूँ कि तुम क्रूर हो, इसलिए मुझे बलपूर्वक घसीटकर ले जाओगे। लेकिन मैं इससे विचलित नहीं होऊँगी। मैं शीघ्र ही अपने पतियों, कुरुवंश के वीर पांडवों से मिलूँगी और उनके साथ इस काम्यक वन में रहने आऊँगी।   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.268.22 
न सम्भ्रमं गन्तुमहं हि शक्ष्ये
त्वया नृशंसेन विकृष्यमाणा।
समागताहं हि कुरुप्रवीरै:
पुनर्वनं काम्यकमागतास्मि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मैं जानती हूँ कि तुम क्रूर हो, इसलिए मुझे बलपूर्वक घसीटकर ले जाओगे। लेकिन मैं इससे विचलित नहीं होऊँगी। मैं शीघ्र ही अपने पतियों, कुरुवंश के वीर पांडवों से मिलूँगी और उनके साथ इस काम्यक वन में रहने आऊँगी।
 
I know that you are cruel, so you will drag me away by force. But I will not be confused by this. I will soon meet my husbands, the brave Pandavas of the Kuru dynasty, and will come back to live with them in this Kamyak forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)