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mahabharat 3.268.17: अर्जुन के गाण्डीव धनुष की प्रत्यंचा से छूटे हुए अत्यन्त वेगवान बाण मेघों के समान गर्जना करते हैं। वे भयानक बाण अर्जुन के हाथ में लगकर अत्यन्त भयंकर शब्द करते हैं। 17॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.268.17 
मौर्वीविसृष्टा: स्तनयित्नुघोषा
गाण्डीवमुक्तास्त्वतिवेगवन्त:।
हस्तं समाहत्य धनंजयस्य
भीमा: शब्दं घोरतरं नदन्ति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के गाण्डीव धनुष की प्रत्यंचा से छूटे हुए अत्यन्त वेगवान बाण मेघों के समान गर्जना करते हैं। वे भयानक बाण अर्जुन के हाथ में लगकर अत्यन्त भयंकर शब्द करते हैं। 17॥
 
The extremely swift arrows released from the string of Arjuna's Gandiva bow roar like clouds. Those terrible arrows hitting Arjuna's hand create a very terrible sound. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)