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mahabharat 3.268.12: कृष्ण! तुम बड़ी-बड़ी बातें करके हमें नहीं रोक सकते। अब तुम्हारे पास दो ही उपाय हैं - या तो सीधे चलकर मेरे हाथी या रथ पर सवार हो जाओ; या पाण्डवों की पराजय के पश्चात करुण स्वर में विलाप करके सौवीर राजा जयद्रथ से दया की याचना करो॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.268.12 
सा क्षिप्रमातिष्ठ गजं रथं वा
न वाक्यमात्रेण वयं हि शक्या:।
आशंस वा त्वं कृपणं वदन्ती
सौवीरराजस्य पुन: प्रसादम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण! तुम बड़ी-बड़ी बातें करके हमें नहीं रोक सकते। अब तुम्हारे पास दो ही उपाय हैं - या तो सीधे चलकर मेरे हाथी या रथ पर सवार हो जाओ; या पाण्डवों की पराजय के पश्चात करुण स्वर में विलाप करके सौवीर राजा जयद्रथ से दया की याचना करो॥12॥
 
Krishna! You cannot stop us by making tall claims. Now you have only two options - either walk straight ahead and ride my elephant or chariot; or beg for mercy from Sauvir King Jayadratha by lamenting in a pitiable voice after the defeat of the Pandavas.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)