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mahabharat 3.268.11: हे द्रुपदपुत्री, कृष्ण! हम सब उन कुलीन कुलों में उत्पन्न हुई हैं जो सत्रह गुणों से संपन्न हैं। इसके अतिरिक्त, हम छः गुणों में पाण्डवों से भी बढ़कर हैं, इसलिए हम उन्हें अपने से हीन समझती हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 268: द्रौपदीका जयद्रथको फटकारना और जयद्रथद्वारा उसका अपहरण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.268.11 
वयं पुन: सप्तदशेषु कृष्णे
कुलेषु सर्वेऽनवमेषु जाता:।
षड्भ्यो गुणेभ्योऽभ्यधिका विहीनान्
मन्यामहे द्रौपदि पाण्डुपुत्रान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे द्रुपदपुत्री, कृष्ण! हम सब उन कुलीन कुलों में उत्पन्न हुई हैं जो सत्रह गुणों से संपन्न हैं। इसके अतिरिक्त, हम छः गुणों में पाण्डवों से भी बढ़कर हैं, इसलिए हम उन्हें अपने से हीन समझती हैं।
 
O daughter of Drupada, Krishna! We all have been born in those noble families which are blessed with seventeen qualities. Besides this, we have surpassed the Pandavas in six qualities; therefore, we consider them inferior to us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)