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mahabharat 3.265.5: भद्रे! आपके पिता और पति के बारे में पूछकर हम आपके प्रति अपना सम्मान बढ़ा रहे हैं। हमें अपने रिश्तेदारों, पति और परिवार का सच्चा परिचय दीजिए और यह भी बताइए कि आप यहाँ क्या काम करती हैं?   |   mahabharat अध्याय 3.265: कोटिकास्यका द्रौपदीसे जयद्रथ और उसके साथियोंका परिचय देते हुए उसका भी परिचय पूछना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.265.5 
वयं हि मानं तव वर्धयन्त:
पृच्छाम भद्रे प्रभवं प्रभुं च।
आचक्ष्व बन्धूंश्च पतिं कुलं च
तत्त्वेन यच्चेह करोषि कार्यम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भद्रे! आपके पिता और पति के बारे में पूछकर हम आपके प्रति अपना सम्मान बढ़ा रहे हैं। हमें अपने रिश्तेदारों, पति और परिवार का सच्चा परिचय दीजिए और यह भी बताइए कि आप यहाँ क्या काम करती हैं?
 
Bhadre! We are increasing our respect towards you by asking about your father and husband. Give us the true introduction of your relatives, husband and family and also tell us what work you do here?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)