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mahabharat 3.260.24: भूख (महान लोगों के भी) धार्मिक ज्ञान को नष्ट कर देती है, धैर्य को हर लेती है और स्वाद के पीछे भागने वाली जीभ मनुष्य को सदैव स्वादिष्ट वस्तुओं की ओर खींचती है। 24.   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.260.24 
क्षुद् धर्मसंज्ञां प्रणुदत्यादत्ते धैर्यमेव च।
रसानुसारिणी जिह्वा कर्षत्येव रसान् प्रति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भूख (महान लोगों के भी) धार्मिक ज्ञान को नष्ट कर देती है, धैर्य को हर लेती है और स्वाद के पीछे भागने वाली जीभ मनुष्य को सदैव स्वादिष्ट वस्तुओं की ओर खींचती है। 24.
 
Hunger destroys the religious knowledge (of even great people), takes away patience, and the tongue which follows the taste always pulls a person towards tasty things. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)