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mahabharat 3.260.17: इस प्रकार सारा भोजन खा लेने के बाद दुर्वासा ने बचे हुए भोजन को अपने शरीर पर लपेट लिया और फिर जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार चले गये।   |   mahabharat अध्याय 3.260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 260: दुर्वासाद्वारा महर्षि मुद्‍गलके दानधर्म एवं धैर्यकी परीक्षा तथा मुद्‍गलका देवदूतसे कुछ प्रश्न करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.260.17 
भुक्त्वा चान्नं तत: सर्वमुच्छिष्टेनात्मनस्तत:।
अथाङ्गं लिलिपेऽन्नेन यथागतमगाच्च स:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सारा भोजन खा लेने के बाद दुर्वासा ने बचे हुए भोजन को अपने शरीर पर लपेट लिया और फिर जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार चले गये।
 
Having consumed the entire meal in this manner, Durvasa took the leftovers and covered his whole body with them and then went away in the same manner as he had come.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)