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mahabharat 3.26.21: वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! तत्पश्चात युधिष्ठिर की स्तुति करके समस्त ब्राह्मणों ने बक्र का सत्कार किया और सभी ब्राह्मणों के मन प्रसन्न हो गए॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.26.21 
वैशम्पायन उवाच
ततस्ते ब्राह्मणा: सर्वे बकं दाल्भ्यमपूजयन्।
युधिष्ठिरे स्तूयमाने भूय: सुमनसोऽभवन्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! तत्पश्चात युधिष्ठिर की स्तुति करके समस्त ब्राह्मणों ने बक्र का सत्कार किया और सभी ब्राह्मणों के मन प्रसन्न हो गए॥ 21॥
 
Vaishmpayana says - O Janamejaya! Thereafter, after praising Yudhishthira, all the Brahmins honoured Bakra and the minds of all the Brahmins became happy. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)