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mahabharat 3.26.16: ब्राह्मणों में अद्वितीय दृष्टि (विचार करने की शक्ति) और क्षत्रियों में अद्वितीय बल है। जब ये दोनों मिलकर कार्य करते हैं, तो सारा जगत सुखी हो जाता है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.26.16 
ब्राह्मण्यनुपमा दृष्टि: क्षात्रमप्रतिमं बलम्।
तौ यदा चरत: सार्धं तदा लोक: प्रसीदति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों में अद्वितीय दृष्टि (विचार करने की शक्ति) और क्षत्रियों में अद्वितीय बल है। जब ये दोनों मिलकर कार्य करते हैं, तो सारा जगत सुखी हो जाता है॥16॥
 
‘Brahmins have unparalleled vision (power of thinking) and Kshatriyas have unparalleled strength. When these two work together, the whole world is happy.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)