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mahabharat 3.26.10: जब ब्राह्मण क्षत्रिय से मिलता है और क्षत्रिय ब्राह्मण से मिलता है, तो दोनों अत्यंत शक्तिशाली हो जाते हैं और अपने शत्रुओं को जलाकर राख कर देते हैं, जैसे अग्नि और वायु मिलकर पूरे जंगल को जला देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 26: दल्भपुत्र बकका युधिष्ठिरको ब्राह्मणोंका महत्त्व बतलाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.26.10 
ब्रह्म क्षत्रेण संसृष्टं क्षत्रं च ब्रह्मणा सह।
उदीर्णे दहत: शत्रून् वनानीवाग्निमारुतौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब ब्राह्मण क्षत्रिय से मिलता है और क्षत्रिय ब्राह्मण से मिलता है, तो दोनों अत्यंत शक्तिशाली हो जाते हैं और अपने शत्रुओं को जलाकर राख कर देते हैं, जैसे अग्नि और वायु मिलकर पूरे जंगल को जला देते हैं।
 
When a Brahmin meets a Kshatriya and a Kshatriya meets a Brahmin, then both become extremely powerful and burn their enemies to ashes, just as fire and wind together burn down an entire forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)